World Photography Day Celebration

World Photography Day Celebration

Category : Event , News , Uncategorized

Wednesday, August 19, 2015 at 12 PM

 

 

विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर झारखंड फोटोग्राफिक असोसिएशन ने अपनी फोटोवाक की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष (2015) चुना है एक ऐसे छोटे से कसबे को जो अपने ऐतिहासिक, सामाजिक और प्राकृतिक विशेषता के कारण झारखंड में एक अनोखी पहचान रखता है. इस बार हम चल पड़े हैं झारखंड में ‘छोटा लन्दन’ के नाम से विख्यात मैक्लुसकीगंज की ओर.

मैक्लुसकीगंज (एक संक्षिप्त परिचय)

रांची जिले में राजधानी से लगभग 65 किलोमीटर दूर यह इलाका एक एंग्लो इंडियन बस्ती के रूप में जाना जाता है. 1933 ई. टी. मैकलुसकी नाम के एक व्यवसायी द्वारा स्थापित कोलोनाइसेशन सोसाइटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड को रातू के महाराजा ने एक समझौते के आधार पर 10000 एकड़ ज़मीन पर एक बस्ती बनाने की अनुमति दी. इस अनुमति में एक बड़ी अहम् शर्त थी की यहाँ कोई भी निर्माण पहाडो और नदियों पर नहीं किया जा सकता. आज के सन्दर्भ में देखें तो यह एक बहूत ही दूरदर्शी निर्णय था. आज की ज़्यादातर प्राकृतिक आपदाएं इसी प्रकार की छेड़छाड़ का नतीजा मानी जाती हैं. बहरहाल, कुछ ही समय में यहाँ लग भग 350 एंग्लो इंडियन परिवार बेहद खूबसूरत बंगलों और बागीचों के बीच आ बसे. यहाँ के ठन्डे मौसम और अंग्रेज़ी तर्ज़ के जीवनयापन शैली से जल्द ही यह स्थान ‘मिनी इंग्लैंड’ के नाम से जाना जाने लगा. मि. मैकलुसकी के सपने को पूरा करने में कई कसर रह गए. रोजगार की कमी और आजादी के बाद एंग्लो इंडियन परिवारों के पलायन से इस कसबे के पूरी तरह से बसने से पहले ही इसका पतन होने लगा.
मैकलुस्किगंज के साथ सिर्फ दुःख की ही यादें नहीं है. इसके प्रकृतिंक सौंदर्य, खूबसूरत बगीचों और बंगलों के साथ साथ सांप्रदायिक सौहार्द के कारण यह क़स्बा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. प्रमुख आकर्षण में यहाँ स्थापित मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा कॉम्प्लेक्स, डेगा-डेगी नदी, जागृति विहार, डॉन बोस्को स्कूल और वॉलीबॉल अकादेमी आदि हैं.

संगठन की कोशिश है कि इस प्रकार के कार्यक्रमों द्वारा हमारे सदस्य अपनी कला का इस्तेमाल अपने प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक धरोहरों को संजोने में करें.


Leave a Reply